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आयकर जमा करते समय होने वाली वो 7 गलतियां जिनके बारे में पता होना चाहिए

आईटीआर फाइलिंग विंडो अब खुल चुकी है और आयकर दाता फाइनेंशियल वर्ष 2018-2019 के लिए अपनी आय का हिसाब-किताब कर टैक्स भरने के लिए कतार में हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 10 Oct 2019, 04:52:05 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

आईटीआर फाइलिंग विंडो अब खुल चुकी है और आयकर दाता फाइनेंशियल वर्ष 2018-2019 के लिए अपनी आय का हिसाब-किताब कर टैक्स भरने के लिए कतार में हैं. ऐसी स्थिति में टैक्स भरते दौरान गलतियां हो जाना बड़ी बात नहीं है. इस वर्ष आयकर दाखिल करने के लिए 31 जुलाई की लम्बी समय सीमा है, इसलिए ऐसी 7 गलतियों के बारे में पता होना जो टैक्स भरते दौरान हो सकती है आपकी आयकर भरने की प्रक्रिया को आसान और सही बना सकता है.

ITR जमा ना करना

आयकर रिटर्न (income Tax Return) दाखिल नहीं करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है. जबकि सिर्फ पैन कार्ड होना भी टैक्स भरने की वजह नहीं है, आप आयकर तभी भरे अगर आपकी वार्षिक आय (वर्ष 2019-20) 2.5 लाख रुपए है, पहले से ही आपकी कंपनी टीडीएस काट चुकी है या इनकम टैक्स रिफंड का दावा कर रही है. अगर आपके ऊपर आयकर बकाया है और आप उसका भुगतान नहीं करते हैं, तो आयकर विभाग आपको नोटिस जारी कर सकता है और भारी जुर्माना भी देना पड़ सकता है. इन सबसे बचने का आसान तरीका यही है कि आयकर जमा करें.

गलत ITR फॉर्म का उपयोग

आयकर भरते समय दूसरी गलती जो अक्सर लोग करते हैं वो है, गलत आईटीआर फॉर्म भर देना. इस गलती का प्रमुख कारण ये है कि आयकर विभाग हर साल आयकर रिटर्न फॉर्म में बदलाव करता है. उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं या आपने अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है तो एसेसमेंट वर्ष 2019-20 में, ITR 1 (SAHAJ) फॉर्म का उपयोग आप नहीं कर सकते जबकि पिछले वर्ष में ऐसा नहीं था. इसलिए यदि आपको इस बदलाव के बारे में पता नहीं है और गलती से आपने ITR 1 का उपयोग करके अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है, तो आपका सबमिशन अस्वीकार हो जाएगा. ई-फाइलिंग की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पता कर कि किस फॉर्म का क्या उपयोग है, टैक्स रिटर्न प्रेपरेर (टीआरपी) से पेशेवर सहायता लेकर या ITR फाइलिंग पोर्टल, चार्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स लॉयर से सहायता लेकर इस गलती से बचा जा सकता है.

देरी से ITR फाइल करना

एसेसमेंट वर्ष 2017-18 के अंत तक, अगर आप पर पहले का आयकर बकाया नहीं है तो आयकर रिटर्न दाखिल करने में देर होने से भी कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती थी. हालांकि अब, एसेसमेंट वर्ष 2018-19 के अनुसार, धारा 234F के माध्यम से देर से आयकर दाखिल करने पर जुर्माना लगाया गया है. ये कानून वर्तमान एसेसमेंट वर्ष 2019-20 में, देरी से जमा किये गए आयकर रिटर्न पर लागू होता है. मौजूदा लेट फाइलिंग नियमों के तहत, अगर आयकर देरी से भरते समय आप पर पहले का कोई आयकर बकाया नहीं भी है तो भी 1,000, रु. 5,000 रु. या 10,000 रु. का जुर्माना लग सकता है. जुर्माना कितना होगा ये आपकी स्तिथि पर निर्भर करता है, इसलिए अपना आयकर रिटर्न समय रहते जमा करें और इस तरह के जुर्माने से खुद को बचाएं.

गलत आय का रिटर्न भरना

कई लोग आयकर भरते समय अपनी आय गलत बताते हैं, कई लोग ऐसा जानबूझकर आयकर से बचने के लिए करते हैं, लेकिन इसका अन्य कारण ये भी हो सकता है कि आयकर रिटर्न भरने की जल्दी में आप ऐसा कर दें। कई बार लोग एफडी से हुई कमाई, सेविंग अकाउंट और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट पर मिलने वाला ब्याज अपनी मूल आय में जोड़ना भूल जाते हैं. आयकर जमा करते समय गलत आय भरने पर आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है, आप पर जुर्माना लगाया जा सकता है या हो सकता है आपको जेल भी जाना पड़े. इसमें से किस तरह का दंड आपको भुगतना पड़े ये उस आय पर निर्भर करता है जिसको आपने आयकर विभाग से छुपाया या गलती से नहीं दिखाया. इसका समाधान यही है कि आयकर रिटर्न फॉर्म में दोनों ही आय भरें, जो आयकर सीमा में आती है और वो भी जो नहीं आती, आयकर विभाग उस सभी आय पर टैक्स लगाएगा जो टैक्स के अंतर्गत आती है.

कैपिटल गेन्स

कैपिटल गेन्स उस कमाई को कहा जाता है जो किसी संपत्ति को बेचके आती है जैसे, शेयर, म्यूच्यूअल फण्ड, इक्विटी, सोना, ज़मीन आदि। इस पर टैक्स इस आधार पर लगाया जाता है कि आपने वस्तु कितने समय (लॉन्ग टर्म और शोर्ट टर्म) में बेची और उस पर कितना लाभ हुआ. जबसे इक्विटी और इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) का नियम आया है तो लोग ये समझ नहीं पा रहे हैं कि एक वर्ष से ज़्यादा के बाद इक्विटी और इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स बेचकर मिली कमाई आयकर में आएगी या नहीं। जबकि नियम ये है कि इस पर भी 10% का आयकर लगेगा. इस वजह से हो सकता है कि आप कैपिटल गेन्स से हुई कमाई की जानकारी आयकर रिटर्न फॉर्म में ना दें और आप पर टैक्स चोरी का आरोप लगे. इसलिए अपने सभी कैपिटल गेन्स से हुई कमाई की जानकारी आयकर भरते समय दें ताकि भविष्य में आप किसी समस्या का सामना ना करें.

गलत निजी जानकारी

भारत में जब से आयकर रिटर्न ई-फाइलिंग शुरू हुआ है तब से ऐसा देखा गया है कि कई बार लोगों की निजी जानकारी गलत हो जाती है, इसका कारण लोगों का जागरूक ना होना है. ई—फाइलिंग फॉर्म में आपकी कुछ जानकारी पहले से भरी होती है जैसे, पता, फोन नंबर आदि। ये जानकारी फॉर्म में आधार, पैन के डाटाबेस से ली जाती है तो अगर आपने पता, नंबर आदि कुछ बदला है और ये जानकारी UIDAI (आधार), NSDL (पैन) में अपडेट नहीं कि है तो हो सकता है आपके फॉर्म में गलत जानकारी आ जाए. इसके अलावा आपको बैंक संबंधित पूरी जानकारी भी फॉर्म में भरनी चाहिए. वर्तमान आयकर नियम के तहत, आपको अपने सभी बैंक खातों की जानकारी फॉर्म में भरनी होगी ना कि सिर्फ उस बैंक खाते कि जिसमें टैक्स रिफंड आएगा.

ITR वेरीफाई करना ना भूलें

आयकर रिटर्न की प्रक्रिया तभी पूरी होती है जब आप आयकर रिटर्न फॉर्म में भरी गई जानकारी को वेरीफाई करते हैं. इसे वेरीफाई करने के पाँच तरीके हैं. पहला, आप आयकर रिटर्न फॉर्म जमा कर उसका प्रिंट लें और उस पर हस्ताक्षर कर उसे ‘सीपीसी बंगलौर’ भेजें। इसके अलावा अन्य चार तरीके ऑनलाइन हैं. आप आधार, नेट बैंकिंग अकाउंट, डीमेट अकाउंट और डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग कर वेरीफाई कर सकते हैं. आपको आयकर रिटर्न फॉर्म जमा करने के 120 दिन के अंदर जानकारी वेरीफाई करनी होगी. वेरीफाई ना करने पर आपका आयकर रिटर्न अस्वीकार हो जाएगा और आपको फिर से रिटर्न जमा करना होगा. इसलिए फॉर्म जमा करने के बाद जल्द से जल्द जानकारी वेरीफाई कर दें.

(यह लेख सिंडिकेट कन्टेंट से प्राप्त हुआ है)

First Published : 06 Jun 2019, 07:16:47 PM

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