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मोरेटोरियम पीरियड में EMI पर ब्याज नहीं लेने की मांग पर फैसले में देरी के चलते कोर्ट में मोदी सरकार की खिंचाई

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और रिजर्व बैंक (RBI) को जल्द फैसला लेने के लिए कहा है. मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2020 को है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार लोगों की तकलीफ को दरकिनार कर सिर्फ व्यापारिक नज़रिए से नहीं सोच सकती है.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 26 Aug 2020, 01:43:52 PM
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मोरेटोरियम (Moratorium) मामले पर केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार की जमकर खिंचाई की है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मोरेटोरियम अवधि के दौरान टाली गई EMI पर ब्याज नहीं लेने की मांग पर कोई स्टैंड न लेने के चलते सरकार की खिंचाई की है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार लोगों की तकलीफ को दरकिनार कर सिर्फ व्यापारिक नज़रिए से नहीं सोच सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और रिजर्व बैंक (RBI) को जल्द फैसला लेने के लिए कहा है. मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2020 को है.

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उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कोविड-19 महामारी को देखते हुए कर्ज की किस्तों को स्थगित किए जाने के दौरान ब्याज पर लिए जाने वाले ब्याज को माफ करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कथित निष्क्रियता को संज्ञान में लिया और निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करे. न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत उसके पास पर्याप्त शक्तियां थीं और वह ‘‘आरबीआई के पीछे छिप रही है. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांग, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया. मेहता ने कहा कि हम आरबीआई के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे आपदा प्रबंधन अधिनियम पर रुख स्पष्ट करें और यह बताएं कि क्या मौजूदा ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज लिया जा सकता है.

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दलीलों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक विस्तार खत्म नहीं होना चाहिए: सिब्बल
पीठ में न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह भी शामिल हैं. मेहता ने तर्क दिया कि सभी समस्याओं का एक सामान्य समाधान नहीं हो सकता. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि कर्ज की स्थगित किस्तों की अवधि 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगी और उन्होंने इसके विस्तार की मांग की. सिब्बल ने कहा कि मैं केवल यह कह रहा हूं कि जब तक इन दलीलों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक विस्तार खत्म नहीं होना चाहिए. मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी. पीठ ने आगरा निवासी गजेन्द्र शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुये यह बात कही. शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि रिजर्व बैंक की 27 मार्च की अधिसूचना में किस्तों की वसूली स्थगित तो की गयी है पर कर्जदारों को इसमें काई ठोस लाभ नहीं दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अधिसूचना के उस हिस्से को निकालने के लिये निर्देश देने का आग्रह किया है जिसमें स्थगन अवधि के दौरान कर्ज राशि पर ब्याज वसूले जाने की बात कही गई है। इससे याचिकाकर्ता जो कि एक कर्जदार भी है, का कहना है कि उसके समक्ष कठिनाई पैदा होती है। इससे उसको भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में दिये गये ‘जीवन के अधिकार’ की गारंटी मामले में रुकावट आड़े आती है.

शीर्ष न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि जब एक बार स्थगन तय कर दिया गया है तब उसे उसके उद्देश्य को पूरा करना चाहिये. ऐसे में हमें ब्याज के ऊपर ब्याज वसूले जाने की कोई तुक नजर नहीं आता है. शीर्ष अदालत का मानना है कि यह पूरी रोक अवधि के दौरान ब्याज को पूरी तरह से छूट का सवाल नहीं है बल्कि यह मामला बैंकों द्वारा बयाज के ऊपर ब्याज वसूले जाने तक सीमित है. न्यायालय ने कहा था कि यह चुनौतीपूर्ण समय है ऐसे में यह गंभीर मुद्दा है कि एक तरफ कर्ज किस्त भुगतान को स्थगित किया जा रहा है जबकि दूसरी तरफ उस पर ब्याज लिया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मामले पर कर चुका है खिंचाई
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी इसी मसले पर केंद्र सरकार की खिंचाई कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने जून में सुनवाई के दौरान कहा था कि केंद्र अब इसे ग्राहकों और बैंक के बीच का मसला बताकर अपना पल्ला झाड़ नहीं सकता है. सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को इसका फायदा मिले. आपने अदालत से समय लेने के बावजूद कुछ नहीं किया. ग्राहकों को पता है कि इस स्कीम से उन्हे लाभ नहीं मिल रहा, लिहाजा वो इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

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बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) ने सोमवार को कहा था कि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) द्वारा घोषित 31 अगस्त तक कर्ज चुकाने की मोहलत (Moratorium) को बढ़ाया नहीं जाना चाहिए. पीएनबी के प्रबंध निदेशक और सीईओ एस एस मल्लिकार्जुन राव (S S Mallikarjuna Rao) का कहना है कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी देखने को मिल रही है. बता दें कि एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के चेयरमैन दीपक पारेख, एसबीआई (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार और सीआईआई के अध्यक्ष उमेश कोटक जैसे प्रमुख बैंकर हाल ही में ऐसे विचार व्यक्त कर चुके हैं.

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गौरतलब है कि आरबीआई ने शुरुआत में इसे मई को खत्म हो रही तीन महीने की अवधि के लिए अनुमति दी थी, लेकिन बाद में इसे अगस्त तक बढ़ा दिया था. राव ने कहा कि पीएनबी की 30,000 करोड़ रुपये की लोन बुक में से सिर्फ 20 से 22 फीसदी खाताधारकों ने आरबीआई की मोरोटोरियम स्कीम के विकल्प को नहीं चुना है.

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First Published : 26 Aug 2020, 12:06:11 PM

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