/newsnation/media/media_files/2026/02/19/share-market-2026-02-19-15-39-28.jpg)
मार्केट में भारी गिरावट Photograph: (GROK AI)
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार 19 फरवरी को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कारोबार के दौरान मेन इनडेक्स सेंसेक्स करीब 1100 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 50 अपने दिन के निचले स्तर 25,567.75 तक पहुंच गया. इस तेज गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया और बाजार में घबराहट का माहौल बन गया.
सबसे ज्यादा असर मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर देखा गया, जहां बिकवाली अधिक तेज रही. बीएसई में लिस्टेड बड़ी कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में 472 लाख करोड़ रुपये से घटकर 466 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. यानी निवेशकों की करीब 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई.
तेजी के बाद मुनाफावसूली
विश्लेषकों के अनुसार, हाल के सत्रों में लगातार बढ़त के बाद बाजार में मुनाफावसूली स्वाभाविक थी. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे सेंशन में बढ़त के साथ बंद हुए थे. बजट, भारत-अमेरिका समझौते और आरबीआई की मौद्रिक नीति जैसे बड़े घरेलू कारकों का असर पहले ही बाजार में शामिल हो चुका था.
तीसरी तिमाही के नतीजों का दौर भी लगभग पूरा हो गया है. ऐसे में बाजार को आगे बढ़ाने के लिए नए घरेलू ट्रिगर की कमी महसूस की जा रही है. यही वजह है कि बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है और हल्की नकारात्मक खबरों पर भी तेज प्रतिक्रिया दे रहा है.
अमेरिकी फेड और वैश्विक संकेतों का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जनवरी बैठक के संकेतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. अधिकारियों के बीच ब्याज दरों को लेकर मतभेद सामने आए हैं. अगर इंफ्लेशन पर काबू नहीं पाया गया तो दरों में कटौती टल सकती है या सख्ती फिर बढ़ सकती है.
ऐसी स्थिति में डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश प्रभावित होता है. हालांकि फरवरी में विदेशी निवेशकों की खरीदारी दोबारा शुरू हुई है, लेकिन अनिश्चित वैश्विक माहौल के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं.
अमेरिका-ईरान तनाव से दिख रहा है असर
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य तनाव की खबरों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया. अगर भू-राजनीतिक स्थिति बिगड़ती है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है.
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी चिंता का विषय है. डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड दोनों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई. भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए ऊंची तेल कीमतें चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं.
आगे क्या है संकेत?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है. वर्ष 2026 में बेहतर इनकम वृद्धि के साथ बाजार में तेजी की संभावना बन सकती है. हालांकि फिलहाल वैल्यूएशन का अंतर साफ दिखाई दे रहा है.
लार्ज कैप शेयर अपेक्षाकृत संतुलित मूल्यांकन पर हैं, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अभी भी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं. यही कारण है कि समझदार निवेशकों के लिए चयनात्मक निवेश का समय है.
कुल मिलाकर, बाजार की मौजूदा गिरावट कई घरेलू और वैश्विक कारकों का संयुक्त परिणाम है. निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है.
ये भी पढ़ें- बांग्लादेश की कमान संभालते ही तारिक रहमान ने दिखाए तेवर, बंद किया भारतीय एयरलाइंस के लिए एयर स्पेस
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us