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आरबीआई ने छोटे कारोबारियों के लिये सकल कर्ज सीमा बढ़ाकर 7.5 करोड़ रुपये की

आरबीआई ने एक विज्ञप्ति में कहा कि 75 प्रतिशत जोखिम भारांश सभी नये कर्ज और मौजूदा ऋण पर लागू होगा. इसके तहत पा) कंपनियां बैंक से 7.5 करोड़ रुपये की संशोधित सीमा तक और कर्ज ले सकेंगी.

By : Ravindra Singh | Updated on: 12 Oct 2020, 11:59:00 PM
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आरबीआई (Photo Credit: आईएएनएस)

मुंबई:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को 50 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयों के लिये खुदरा ऋण सीमा बढ़ाकर 7.5 कररोड़ रुपये कर दी. पहले यह सीमा 5 करोड़ रुपये थी. इस पहल का मकसद छोटी कंपनियों के लिये कर्ज प्रवाह बढ़ाना है. आरबीआई ने एक विज्ञप्ति में कहा कि 75 प्रतिशत जोखिम भारांश सभी नये कर्ज और मौजूदा ऋण पर लागू होगा. इसके तहत पा) कंपनियां बैंक से 7.5 करोड़ रुपये की संशोधित सीमा तक और कर्ज ले सकेंगी.

इसमें कहा गया है, ‘‘पचास करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले व्यक्तिगत और छोटी कंपनियों के लिये कर्ज की लागत में कमी लाने और बासेल दिशानिर्देश के अनुरूप करने के लिये, सकल खुदरा कर्ज के लिये 5 करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर 7.5 करोड़ रुपये करने का निर्णय किया गया है.’’ इससे पहले, मौद्रिक नीति सिमिति की बैठक के बाद नौ अक्टूर को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इसकी घोषणा की थी.

एक अन्य अधिसूचना में आरबीआई ने कहा कि एक सितंबर, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक एसएलआर (सांवधिक तरलता अनुपात) प्रतिभूतियों के लिये ‘हेल्ड टू मैच्युरिटी’ (परिपक्व होने तक प्रतिभूति रखना) के तहत बढ़ी हुई सीमा 22 प्रतिशत की व्यवस्था को 31 मार्च, 2022 तक रखने की अनुमति देने का निर्णय किया गया है. बैंक अब इस प्रकार की अतिरिक्त एसएलआर प्रतिभूतियां एचटीएम श्रेणी में 31 मार्च, 2022 तक रख सकती हैं. आरबीआई ने यह भी निर्णय किया है कि बढ़ी हुई एचटीएम सीमा को 30 जून, 2022 को समाप्त तिमाही से चरणबद्ध तरीके से 19.5 प्रतिशत के स्तर पर लाया जाएगा. 

First Published : 12 Oct 2020, 11:59:00 PM

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