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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बावजूद भारत के निर्यात पर इसका बड़ा नकारात्मक असर नहीं दिखा है. वैश्विक अनिश्चितताओं और टैरिफ दबाव के बीच भारत ने निर्यात के मोर्चे पर मजबूती दिखाई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 1.87 प्रतिशत बढ़कर 38.5 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है.
इंपोर्ट बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट में हल्की बढ़ोतरी
हालांकि निर्यात में तेजी के साथ-साथ आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. दिसंबर 2025 में भारत का इंपोर्ट 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया. इसी वजह से देश का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 25.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
क्या होता है ट्रेड डेफिसिट
ट्रेड डेफिसिट का अर्थ निर्यात और आयात के बीच के अंतर से होता है. नवंबर 2025 में यह आंकड़ा 24.53 अरब डॉलर था, जबकि दिसंबर 2024 में 22 अरब डॉलर दर्ज किया गया था.
वित्त वर्ष में निर्यात की समग्र तस्वीर
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर की अवधि को देखें तो भारत का कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 2.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 330.29 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है. वहीं, इस दौरान आयात 5.9 प्रतिशत बढ़कर 578.61 अरब डॉलर हो गया.
इस तरह नौ महीनों में भारत का कुल ट्रेड डेफिसिट 248.32 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो आयात में तेज वृद्धि को दर्शाता है.
कॉमर्स सेक्रेटरी का भरोसा, 850 अरब डॉलर का लक्ष्य
कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने नए आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वैश्विक हालात चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक रुझान दिखा रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का कुल एक्सपोर्ट जिसमें सामान और सेवाएं दोनों शामिल हैं 850 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है.
उनके मुताबिक इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर्स ने शिपमेंट ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई है.
अमेरिका को निर्यात में मजबूती बरकरार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत का अमेरिका, चीन और यूएई को निर्यात लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर के दौरान अमेरिका को भारत के निर्यात में सालाना आधार पर 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अमेरिका को कुल निर्यात बढ़कर 65.9 अरब डॉलर हो गया है.
हालांकि अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने से टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी जैसे कुछ सेक्टर्स पर दबाव जरूर देखा गया है, लेकिन समग्र रूप से भारत का निर्यात प्रदर्शन अब भी संतुलित और मजबूत बना हुआ है.
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