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सिंगापुर में फ्लिपकार्ट पर बिकेगा UP का काला नमक चावल, जानिए खासियत

सिंगापुर की कंपनी कपिलवस्तु किसान निर्माता कंपनी लिमिटेड द्वारा सिद्धार्थ नगर के प्रसिद्ध काले चावल की एक खेप को भेजे जाने का ऑर्डर दिया गया था, जिसे अतिरिक्त मुख्य सचिव (एमएसएमई) नवनीत सहगल ने मंजूरी दे दी.

IANS | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 22 Jun 2021, 01:21:37 PM
Kala Namak Paddy

Kala Namak Paddy (Photo Credit: NewsNation)

highlights

  • सिद्धार्थ नगर में ओडीओपी के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जा रहा है
  • भंडारण, पैकेजिंग और ग्रेडिंग सुविधाओं के लिए वातानुकूलित गोदाम उपलब्ध कराएगा

लखनऊ:

सिद्धार्थ नगर से 250 किलोग्राम काला नमक चावल (Kala Namak Rice) की एक खेप सिंगापुर के लिए निर्यात ऑर्डर पर भेज दी गई है. इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर उपलब्ध कराया जाएगा. सिंगापुर की कंपनी कपिलवस्तु किसान निर्माता कंपनी लिमिटेड द्वारा सिद्धार्थ नगर के प्रसिद्ध काले चावल की एक खेप को भेजे जाने का ऑर्डर दिया गया था, जिसे अतिरिक्त मुख्य सचिव (एमएसएमई) नवनीत सहगल ने मंजूरी दे दी. उन्होंने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) और फ्लिपकार्ट सहयोग के एक नए स्तर पर पहुंच गए हैं. फ्लिपकार्ट के माध्यम से हम काला नमक चावल को दुनिया के किसी भी हिस्से में ले जा सकते हैं. इससे किसानों को अपनी उपज के लिए अच्छी कमाई करने में मदद मिलेगी.

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सहगल ने कहा कि सिद्धार्थ नगर में ओडीओपी के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जा रहा है. यह भंडारण, पैकेजिंग और ग्रेडिंग सुविधाओं के लिए वातानुकूलित गोदाम उपलब्ध कराएगा. अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान द्वारा सिद्धार्थ नगर में काला नमक चावल पर काम करने के लिए एक शोध संस्थान भी स्थापित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ नगर जिले के 12 विकास खंडों में काला नमक चावल के लिए एफपीओ स्थापित किए गए हैं.

गौतमबुद्ध से जुड़े इस चावल का नाम ही पूर्वाचल के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. 1960 के दशक में जब उल्लेखित तीन मंडलों में करीब 50 हजार हेक्टेअर पर इसकी खेती होती थी, उस समय इसकी सुगंध खेत, खलिहान से लेकर रसोई तक बिखरती थी. कुछ मिलावट और काफी हद तक धान की बौनी और अधिक उपज वाली प्रजातियों के आने के बाद इसका रकबा सिमटता गया. 1990 से 2010 के दौरान तो यह सिमटकर 2000 से 3000 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया था. लुप्त हो रही इस प्रजाति को उस समय देश के जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. आर.सी चौधरी ने संजीवनी दी. उन्होंने काला नमक की अपेक्षात बौनी, कम समय में अधिक उपज देने वाली प्रजातियों-केएन-3, बौना काला नमक-101 और 102 और काला नमक किरन का विकास किया. उपज बढ़ने और परिपक्वता की मियाद घटने के नाते सन 2010 के बाद इसके रकबे में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.

First Published : 22 Jun 2021, 01:21:02 PM

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