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दालों की कालाबाजारी को रोकने के लिए मोदी सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

विभाग कालाबाजारी पर अंकुश लगाने, निर्यात को प्रतिबंधित कर सप्लाई बढ़ाने और इंपोर्ट को प्रोत्साहित करना, बफर स्टॉक बनाना एवं कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी को लेकर भंडार जारी करने को लेकर सुनिश्चित कर रहा है.

Business Desk | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 01 Oct 2021, 03:46:37 PM
Pulses Latest News

Pulses Latest News (Photo Credit: NewsNation)

highlights

  • 20 सितंबर तक कम से कम 11,635 भंडारधारकों ने 30,97,694.42 मीट्रिक टन दाल का भंडार
  • भंडार में कोई वृद्धि या घटाव होता है, तो डेटा को अपडेट करना हितधारकों की जिम्मेदारी है

नई दिल्ली:

उपभोक्ता मामले विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर 20 सितंबर, 2021 तक कम से कम 11,635 भंडारधारकों ने 30,97,694.42 मीट्रिक टन दालों के भंडार की घोषणा करते हुए पंजीकरण कराया गया है. बता दें कि उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का उपभोक्ता मामले विभाग 22 आवश्यक खाद्य वस्तुओं के खुदरा और थोक मूल्यों की निगरानी कर रहा है. विभाग कालाबाजारी पर अंकुश लगाने, निर्यात को प्रतिबंधित कर सप्लाई बढ़ाने और इंपोर्ट को प्रोत्साहित करना, बफर स्टॉक बनाना एवं कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी को लेकर भंडार जारी करने को लेकर सुनिश्चित कर रहा है. 

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डेटा बैंक बनाया जाएगा
इस सिलसिले में खुले बाजार में उपलब्ध दालों के आंकड़ों का दोहन करना जरूरी था. इसलिए, माननीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल की मंजूरी के साथविभाग ने स्टॉकिस्ट, मिल मालिकों, आयातकों और डीलरों जैसे विभिन्न भंडार धारकों को किसी भी दी गयी तारीख पर अपने पास मौजूद भंडार की जानकारी देने की खातिर प्रोत्साहित करने के लिए एक पोर्टल तैयार किया है. व्यापारियों, मिल मालिकों, आयातकों, और सरकारी एवं निजी स्वामित्व वाले गोदामों के माध्यम से भंडार की घोषणा की मदद से एक डेटा बैंक बनाया जाएगा. इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि वे कौन से राज्य हैं जो कटाई-पिसाई-पेराई (मिलिंग) आदि उद्देश्यों के लिए उत्पादन और भंडारण करते हैं. भंडार संबंधी इस घोषणा और उस के रियल-टाइम सत्यापन के माध्यम से जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की अवांछनीय प्रथाओं पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी.

पोर्टल - https://fcainfoweb.nic.in/psp - को भी कोई भी नागरिक एक्सेस कर सकता है. ओटीपी के माध्यम से ईमेल और मोबाइल के सत्यापन के बाद हितधारक पोर्टल में पंजीकरण कर सकते हैं और यूजर आईडी एवं पासवर्ड बना सकते हैं. यूजर आईडी और पासवर्ड बनाने के बाद, वे अपने विवरण एवं भौगोलिक जानकारी जोड़कर अपने प्रोफाइल में जानकारी साझा करते हैं और किसी भी तारीख को अपने भंडार में मौजूद अलग-अलग दालों की जानकारी देते हैं. जब भी भंडार में कोई वृद्धि या घटाव होता है, तो डेटा को अपडेट करना हितधारकों की जिम्मेदारी है.

डेटा की गोपनीयता बनाए रखी जाती है. राज्य और केंद्र सरकार के अलावा किसी भी भंडार धारक द्वारा घोषित डेटा उन्हें दिखाई देगा. डेटा उन्हें किसी भी तारीख को भंडारों की आवाजाही और उनके साथ भंडार की मात्रा जानने में मदद करता है. राज्य सरकारें अपने स्वयं के राज्यों से संबंधित विभिन्न हितधारकों द्वारा किए गए पंजीकरण और घोषित भंडार की निगरानी कर सकती हैं. यह उनके राज्य में उपलब्ध विभिन्न दालों के भंडार की मात्रा का डेटा देता है. यह किसी विशेष दाल की उपलब्धता में किसी भी अपेक्षित कमी के बारे में भी जानकारी देता है ताकि राज्य सरकार स्थिति के आधार पर आयात के माध्यम से या केंद्रीय बफर के माध्यम से सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर सके.

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उपभोक्ता मामले विभाग राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखता है. यह देश भर में किसी विशेष दाल की उपलब्धता में किसी भी अपेक्षित कमी के बारे में भी जानकारी देता है ताकि सरकार तत्काल आयात या निर्यात को प्रतिबंधित करने या स्थिति के आधार पर केंद्रीय बफर में भंडार जारी करने के माध्यम से सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर सके. पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सरकार द्वारा उठाए जाने वाले विभिन्न उपायों से उपभोक्ताओं के लिए सस्ती कीमतों पर दालों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. -इनपुट पीआईबी

First Published : 01 Oct 2021, 03:46:37 PM

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