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बासमती चावल की खेती के लिए देहरादून हमेशा से प्रसिद्ध, दुनियाभर में है मांग

देश में बासमती चावल की खेती के लिए देहरादून हमेशा से प्रसिद्ध रहा है जो लोग देहरादून को जानते हैं वह जानते हैं कि यहां बड़े पैमाने पर बासमती चावल की खेती हमेशा से की जाती रही है. अफगानिस्तान से बासमती के देहरादून पहुंचने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 10 Jun 2021, 05:35:51 PM
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सांकेतिक चित्र (Photo Credit: फाइल )

देहरादून :

देश में बासमती चावल की खेती के लिए देहरादून हमेशा से प्रसिद्ध रहा है जो लोग देहरादून को जानते हैं वह जानते हैं कि यहां बड़े पैमाने पर बासमती चावल की खेती हमेशा से की जाती रही है. अफगानिस्तान से बासमती के देहरादून पहुंचने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. भारत के सात राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में इसकी पैदावार होती है. वहीं पाकिस्तान के पंजाब के 14 जिलों में बासमती चावल का उत्पादन होता है. जानकारों का कहना है कि गंगा के मैदानी इलाकों में  पानी, मिट्रटी, हवा और तापमान की वजह से बासमती की क्वॉलिटी अन्य दूसरे चावल के मुकाबले सबसे बेहतर होती है.

हालांकि अब देहरादून में खेती का प्रचलन थोड़ा कम हो गया है लेकिन अभी भी देहरादून के कई हिस्से में बासमती का उत्पादन किया जाता है. देहरादून के केसर वाला,  दूधली और पछवादून क्षेत्र में आज भी बड़े पैमाने पर बासमती की खेती की जाती है. देहरादून के केसर वाला में अब बासमती की खेती बहुत कम खेतों में होती है, लेकिन अब स्थानीय लोग ऑर्गेनिक बासमती पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. केसर वाला के रहने वाले गब्बर सिंह बिष्ट बताते हैं कि बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में बासमती की खेती हमेशा से होते रहिए ठेकेदार खेतों में ही फसल का ठेका ले लिया करते थे. वहीं गांव की महिलाएं भी कहती हैं कि बासमती के लिए शुरू से ये क्षेत्र प्रसिद्ध रहा है. 

केसर वाला गांव के युवा कहते हैं कि पहले की तुलना में अब ज्यादा लोग बासमती की खेती नहीं कर रहे हैं. लोगों ने प्लॉटिंग करके अपने ज्यादा खेत बेच दिए हैं लेकिन अभी भी जो लोग बासमती का उत्पादन कर रहे हैं उनकी डिमांड बहुत है. जानकार रमेश पेटवाल बताते हैं कि हमेशा से देहरादून की बासमती की डिमांड बहुत रही है बाजार में अलग-अलग ब्रांड के नाम से देहरादून की लोकल बासमती बिकती है. क्योंकि जो भी पर्यटक उत्तराखंड आता है और राजधानी देहरादून जब वह पहुंचता है तो देहरादून में बासमती की डिमांड सबसे पहले होती है लोकल बासमती की मांग सबसे ज्यादा है.

बासमती की पौध इन दिनों नर्सरी में तैयार की जा रही हैं.  अगले 15 से 20 दिनों में रोपाई करके बासमती की पूरी पौध लगाई जाएगी. बासमती की क्वांटिटी भले ही कम हुई हो लेकिन आज भी देहरादून की बासमती की क्वालिटी बरकरार है. अफगानिस्तान के दोस्त मोहम्मद खान पहली बार बासमती उगाने वाले शख्स रहे हैं अफगानिस्तान से निर्वाचित होने के बाद राजधानी देहरादून में उन्होंने अपना समय बिताया. अफगानिस्तान से बासमती का बीज मंगाया और देहरादून में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की.

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First Published : 10 Jun 2021, 05:35:51 PM

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