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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में सर्वाइकल कैंसर का खतरा लगातार बढ़ रहा है और यह अब सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं की बीमारी नहीं रही। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, हर आठ मिनट में एक महिला की मौत सिर्फ इस कैंसर की वजह से होती है। यह आंकड़ा बहुत चिंताजनक है और अब इस बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
आईएएनएस से खास बातचीत में डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण एचपीवी वायरस (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) है, खासकर इसके हाई-रिस्क स्ट्रेन्स जैसे टाइप 16 और 18। यह वायरस सेक्स के जरिए फैलता है और इसके करीब 200 प्रकार होते हैं। इनमें से कुछ ही कैंसर पैदा करते हैं। डॉ. पाठक बताती हैं कि लगभग 95 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामले लंबे समय तक एचपीवी इंफेक्शन के कारण होते हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ महिलाओं में इसकी संभावना ज्यादा होती है। उदाहरण के लिए, जिन महिलाओं में सेक्सुअल एक्टिविटी जल्दी शुरू होती है, जिनकी प्यूबर्टी जल्दी आती है या जिनकी मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) देर से होती है, उनमें यह बीमारी जल्दी हो सकती है। इसके अलावा, जिनके मल्टीपल सेक्सुअल पार्टनर्स हैं या जिनका हाई पेरेंटिटी, यानी कई बार बच्चा जन्म देने का इतिहास है, उनके लिए भी खतरा बढ़ जाता है।
जीवनशैली संबंधी कुछ आदतें भी इस रिस्क को बढ़ाती हैं। स्मोकिंग, शराब का सेवन, लंबे समय तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का इस्तेमाल या कोई इम्यून सिस्टम कमजोर करने वाली बीमारी जैसे एचआईवी भी सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।
अब बात करें लक्षणों की। सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती संकेत कई महिलाओं द्वारा अनदेखा कर दिए जाते हैं। सबसे आम लक्षण है एबनॉर्मल वजाइनल ब्लीडिंग, जो सेक्स के बाद पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज के बाद हो सकती है। दूसरा लक्षण है फाउल स्मेलिंग वॉटररी डिस्चार्ज, जो अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं, जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, तो वजन घटना, पीठ या कमर में दर्द, यूरिन करने में परेशानी और कब्ज जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
डॉ. पाठक की सलाह है कि महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। कोई भी असामान्य ब्लीडिंग या डिस्चार्ज अनदेखा न करें। समय पर जांच और सावधानी ही इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के दो मुख्य तरीके हैं। पहला है सक्रिय स्क्रीनिंग, जैसे पैप स्मीयर टेस्ट, जिससे शुरुआती बदलावों का पता लगाया जा सकता है। दूसरा है एचपीवी वैक्सीन, जो संक्रमण और कैंसर दोनों से बचाव करती है। डॉक्टर सुझाव देते हैं कि युवा और मध्य आयु वर्ग की महिलाएं इसे जरूर लगवाएं।
अगर स्क्रीनिंग में कोई एबनॉर्मलिटी आती है, तो आगे की जांच में कोलपोस्कोपी या सर्वाइकल बायोप्सी की जाती है। इसके बाद अगर कैंसर पाया जाता है तो उसकी स्टेजिंग की जाती है। शुरुआती स्टेज में केवल सर्जरी (हिस्ट्रेक्टोमी) की जा सकती है, जबकि एडवांस्ड स्टेज में सर्जरी के साथ रेडिएशन या कीमोथेरेपी दी जाती है। स्टेजिंग के आधार पर डॉक्टर सबसे सही इलाज तय करते हैं।
डॉ. पाठक कहती हैं कि जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और यही देर उन्हें जानलेवा साबित कर सकती है। इसलिए अगर किसी महिला को ब्लीडिंग, अजीब डिस्चार्ज, बैक पेन या वजन में अचानक कमी नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
--आईएएनएस
पीआईएम/वीसी
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