ट्रंप वेनेजुएला में तेल तक पहुंच को लेकर थे परेशान, अमेरिका के पूर्व एनएसए का दावा

ट्रंप वेनेजुएला में तेल तक पहुंच को लेकर थे परेशान, अमेरिका के पूर्व एनएसए का दावा

ट्रंप वेनेजुएला में तेल तक पहुंच को लेकर थे परेशान, अमेरिका के पूर्व एनएसए का दावा

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IANS
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Arul Louis, al/, Pakistan assures US it will deal 'firmly' with terrorists, John Bolton

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई की दुनियाभर में निंदा हो रही है। इस सिलसिले में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने आईएएनएस से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला पर कार्रवाई के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन किया गया। किसी देश पर हमला करने के बाद उसके राष्ट्रपति का अपहरण करके नए साल की शुरुआत करने वाले वाले ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए या नहीं? इस पर पूर्व अमेरिकी एनएसए ने अपनी बातें रखी।

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वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को लेकर पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने कहा, मुझे लगता है कि हमने अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से पालन किया। हमें वेनेजुएला के जायज विपक्ष का समर्थन मिला, जो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली करने के बाद मादुरो के सत्ता पर काबिज रहने का जवाब दे रहा था। 2024 के चुनाव में धांधली की वेनेजुएला और इंटरनेशनल सभी देखने वालों ने पुष्टि की थी। वैसे, उन्होंने 2018 में भी इलेक्शन धांधली की थी, जब हमने मादुरो को हटाने की उनकी कोशिश में अंतरिम राष्ट्रपति जुआन गुएडो का समर्थन किया था।

उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि उस बैकग्राउंड को समझना जरूरी है क्योंकि बहुत से लोग कहते हैं कि यह रूस के यूक्रेन पर हमले या चीन के ताइवान पर हमले जैसी दूसरी गतिविधि के लिए एक मिसाल है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। लेकिन, परेशानी यह है कि ट्रंप ने असल में राज नहीं बदला है। उन्होंने मादुरो को हटा दिया है, लेकिन तानाशाही राज अभी भी बना हुआ है। और यह बहुत कन्फ्यूजिंग है क्योंकि शनिवार को ट्रंप ने जो टिप्पणी की, उनमें ऐसा लग रहा है कि वह राज से निपटने के लिए तैयार हैं, बस जब तक मादुरो वहां नहीं हैं।

पूर्व एनएसए ने इस बात को माना कि ट्रंप वेनेजुएला से तेल निकालने को लेकर परेशान थे। उन्होंने कहा, ट्रंप जो करते हैं, उससे कोई आम राय बनाने की कोशिश करना हमेशा एक गलती होती है क्योंकि वह किसी सही सोच या राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के आधार पर काम नहीं करते। यह बहुत लेन-देन वाला है। इस मामले में, ऐसा लगता है कि वह वेनेजुएला के तेल तक पहुंच पाने को लेकर परेशान हैं। जाहिर है, कई दूसरी स्थितियों में ऐसा नहीं होता। इसलिए मुझे लगता है कि इस शुरुआती दौर में, जब अभी भी बहुत कुछ पता नहीं है, मैं इस बारे में कोई बड़ा नतीजा निकालने में बहुत हिचकिचाऊंगा कि वह कहीं और क्या कर सकते हैं।

बता दें, सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप ने बयान दिया था कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में बसेंगी और पैसा कमाएंगी। इसे लेकर पूर्व अमेरिकी एनएसए ने कहा, मुझे लगता है कि यह एक कल्पना है। सच तो यह है कि वेनेजुएला में शावेज-मादुरो की तानाशाही के लगभग 30 सालों में, उन्होंने देश का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर, पंपिंग, ट्रांसमिशन, और तेल की लोडिंग को चलाया है। उनके पास वह सारा इंफ्रास्ट्रक्चर था और उन्होंने उसे बहुत बुरी तरह खराब कर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि वेनेजुएला की एक्सपोर्ट क्षमता में अच्छी-खासी बढ़ोतरी करने के लिए, आपको लंबे समय तक अरबों-खरबों डॉलर के निवेश की जरूरत है। यह ऐसी चीज नहीं है, जिसे आप लाइट के स्विच की तरह ऑन और ऑफ कर सकें। वेनेजुएला में बहुत अनिश्चित राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अमेरिकी और दूसरी विदेशी तेल कंपनियां तब तक बड़े कैपिटल कमिटमेंट करने में बहुत हिचकिचाएंगी, जब तक उन्हें और ज्यादा पता न चल जाए।

उन्होंने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार देने को लेकर कहा, अगर आप उन्हें यहां कुछ और दिन देंगे, तो वे बताएंगे कि वेनेजुएला से मादुरो को निकालने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार क्यों मिलना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि इसकी संभावना कम है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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