अचानक ही गायब हो गई क्यूबेक की 'लेक रूज', नासा ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दिखाई सच्चाई

अचानक ही गायब हो गई क्यूबेक की 'लेक रूज', नासा ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दिखाई सच्चाई

अचानक ही गायब हो गई क्यूबेक की 'लेक रूज', नासा ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दिखाई सच्चाई

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IANS
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lac rouge dried up

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। मई 2025 में अचानक एक हकीकत से कनाडा रूबरू हुआ। क्यूबेक प्रांत की ये सच्चाई भयावह थी। यहां की एक झील लेक रूज अचानक गायब हो गई! महीनों बाद ये घटना सुर्खियों में इसलिए है क्योंकि अब इसे लेकर ठोस वैज्ञानिक तथ्य और सैटेलाइट अध्ययन सामने आ चुके हैं।

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झील जो मई 2025 में अचानक सूख गई थी, उस समय इसे स्थानीय और असामान्य प्राकृतिक घटना मानकर ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। बाद में जब अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों और वैज्ञानिक विश्लेषण ने इसके पीछे की पूरी प्रक्रिया को दर्ज किया, तब यह मामला वैश्विक मीडिया और शोध जगत में चर्चा का विषय बना।

इस घटना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था “द डिसअपीयरेंस ऑफ लेक रूज।” यह अध्ययन 13 जुलाई 2025 को जारी किया गया। इसमें लैंडसैट-9 सैटेलाइट के ओएलआई-2 उपकरण से ली गई उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरों का विश्लेषण किया गया। इन तस्वीरों से यह साफ हुआ कि लेक रूज ने 29 अप्रैल 2025 और 14 मई 2025 के बीच लगभग पूरा पानी खो दिया। जून 2024 में जहां झील पूरी तरह भरी हुई दिखाई देती थी, वहीं जून 2025 की तस्वीरों में उसकी जगह सूखी और खाली जमीन दिखी।

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, सैटेलाइट डेटा से यह भी प्रमाणित हुआ कि झील का पानी धीरे-धीरे नहीं बल्कि एक झटके में बाहर निकला। पानी ने एक नया प्राकृतिक रास्ता बनाया और लगभग 10 किलोमीटर तक बहते हुए पास की एक अन्य झील में चली गई। इस तरह के अचानक जल-निकास को भूविज्ञान की भाषा में “आउटबर्स्ट फ्लड” कहा जाता है, जो आमतौर पर ग्लेशियर झीलों में देखा जाता है, लेकिन सामान्य झीलों में यह बेहद दुर्लभ है।

इसके बाद अगस्त 2025 की शुरुआत में अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़ी वेबसाइटों जैसे स्पेस डॉट कॉम और अन्य सैटेलाइट-आधारित विश्लेषण रिपोर्टों ने भी लैंडसैट-9 के डेटा के आधार पर नासा के निष्कर्षों की पुष्टि की। इन रिपोर्टों ने यह दिखाया कि झील के किनारों की मिट्टी और प्राकृतिक बांध पहले से कमजोर थे और भारी बर्फ पिघलने के कारण पानी का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे झील का संतुलन टूट गया।

इन्हीं वैज्ञानिक तथ्यों के सामने आने के बाद सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या इसे केवल एक प्राकृतिक दुर्घटना माना जाए या फिर जंगलों की कटाई, पुरानी वन-आग और जलवायु परिवर्तन जैसी मानवीय गतिविधियों ने इस घटना की संभावना को और बढ़ा दिया। इस तरह लेक रूज का मामला अब सिर्फ एक झील के गायब होने की कहानी नहीं रह गया, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन पर चल रही वैश्विक बहस का हिस्सा बन गया है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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