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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई जानना चाहता है कि क्या कोई ऐसा भोजन है जो हमारी रोज की सारी न्यूट्रिशन जरूरतें पूरी कर दे, लेकिन कोई भी एक फूड पूरे शरीर की हर रोज की जरूरतें अकेले नहीं पूरी कर सकता। हमारा शरीर प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल, फाइबर, फाइटो-न्यूट्रिएंट्स, एंटीऑक्सीडेंट और पानी जैसी कई चीजों का संतुलन चाहता है और एक ही फूड में ये सब कुछ नहीं होता।
लेकिन हां, कुछ फूड्स ऐसे जरूर हैं जो लगभग 50-70 प्रतिशत तक न्यूट्रिशन प्रोवाइड कर सकते हैं और बाकी की कमी आप संतुलित भोजन से पूरी कर सकते हैं। आयुर्वेद भी यही कहता है कि एकाहार नहीं, संतुलित आहार ही असली रासायन है।
साइंस और आयुर्वेद दोनों ही दूध को लगभग परफेक्ट खाना मानते हैं। यह हाई-क्वालिटी प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी12, फैट-सॉल्युबल विटामिन और एनर्जी देता है। हालांकि, इसमें विटामिन सी, आयरन और कुछ मिनरल कम होते हैं।
अंडा शरीर के लिए सबसे बायोलॉजिकल वैल्यू वाला प्रोटीन देता है। इसमें 6 ग्राम प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, आयरन, सेलेनियम, विटामिन डी और कोलीन होता है, लेकिन इसमें फाइबर और विटामिन सी नहीं होते।
सूखे मेवे और नट्स जैसे बादाम, काजू, अखरोट और किशमिश माइक्रो न्यूट्रिएंट्स का पावरहाउस हैं। ये ओमेगा-3, विटामिन ई और जिंक, मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स देते हैं, लेकिन ये प्रोटीन और पानी में घुलनशील विटामिन पूरी तरह नहीं देते।
बाजरा, रागी, और ज्वार भी रोज की न्यूट्रिशन जरूरतों को 60-70 प्रतिशत तक पूरा कर सकते हैं। रागी कैल्शियम का बड़ा स्रोत है, ज्वार फाइबर और बी-कॉम्प्लेक्स देता है, और बाजरा आयरन और प्रोटीन देता है।
केला तुरंत ऊर्जा और इलेक्ट्रोलाइट्स देता है, लेकिन इसमें प्रोटीन और जरूरी फैट की मात्रा कम होती है।
सही पोषण पाने के लिए पांच सब्जियों का रोजाना संतुलित सेवन करना काफी है, एक मौसमी फल (विटामिन सी प्लस एंटीऑक्सीडेंट), एक कटोरी दाल या स्प्राउट्स (प्रोटीन प्लस मिनरल्स), एक सर्विंग बाजरा या संतोषजनक अनाज (फाइबर प्लस स्लो एनर्जी), 5-7 सूखे मेवे (स्वस्थ वसा प्लस विटामिन ई प्लस जिंक), और 1 ग्लास दूध या दही (प्रोटीन प्लस कैल्शियम)।
असल में, ह्यूमन ब्रेस्ट मिल्क ही एक परफेक्ट फूड है, और वह भी सिर्फ शिशुओं के लिए। एडल्ट्स के लिए कोई एक फूड परफेक्ट नहीं है। कॉम्बिनेशन ही न्यूट्रिशन देते हैं। इसलिए, जहां कल्चर में दिन भर में 8-10 तरह का भोजन होता है, वहां रोग बहुत कम मिलते हैं। आयुर्वेद में संतुलन और वैरायटी को ही असली इम्यूनिटी बूस्टर माना गया है।
--आईएएनएस
पीआईएम/डीकेपी
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